चीन के बारे में कई प्रश्न पूछे गए हैं. विशेषकर ये कि चीन में हो रही है घटनाओं का भारत पर क्या असर पड़ा है. इसके अलावा कोरोना महमारी की तीसरी लहर, ट्रेवल बैन और वैक्सीन बूस्टरों पर भी सवाल पूछे जा रहा हैं. आइए जानते हैं ताज़ा स्थिति का सारांश –
शुरूआत चीन से करते हैं. चीन इस समय बड़ी तेज़ी से कोविड की पाबंदियों को हटा रहा है. लेकिन वहां की आबादी में नेचुरल इंफ़ेक्शन से एक्सपोज़र बहुत कम है. इस वक्त जो वेरिएंट फैल रहे हैं वो ऑमिक्रोन के वेरिएंट हैं. जिस आबादी में टीकाकरण पूरा हो गया है वहां ये वेरिएंट्स इवॉल्व हो गए हैं. इस वजह से ये वेरिएंट अधिक संक्रामक हो गए हैं.
आसान शब्दों में इसका अर्थ है कि चीन में बहुत से लोगों को संक्रमण होगा. आपको अप्रैल-मई 2021 और जनवरी 2022 याद होगा. इस दौरान भारत में सैकड़ों लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ था. अगर जल्द ही चीन ने कुछ नहीं किया तो वहां भी यही स्थिति हो सकती है. जितने अधिक संक्रमण उतने अधिक बीमार लोग.
चीन की अधिकतर आबादी को वैक्सीन के दो डोज़ मिल चुके हैं. अधिकतर संक्रमित लोग घर के भीतर ही ठीक जाएंगे लेकिन चूंकि चीन की आबादी बहुत है इसलिए जनसंख्या का बहुत छोटे हिस्सा भी अगर गंभीर रूप से बीमार पड़ा तो मरने वालों की संख्या बहुत होगी.
चीन में अधिकतर लोगों को वैक्सीन के दो डोज़ लगे हैं. लेकिन बूस्टर टीकों का लेवल काफ़ी कम है. चीन में साइनोफ़ॉर्म कंपनी की वैक्सीन इस्तेमाल की गई है.
चीन की इन-एक्टिवेट्ड वैक्सीन गंभीर बीमारी या मौत से सुरक्षा देती है लेकिन उतनी नहीं जितनी सुरक्षा वेक्टर्ड या एमआरएनए तकनीक से बनी वैक्सीन देती है. इस वैक्सीन के साथ बूस्टर मददगार साबित हो सकता है. उम्मीद है कि चीन से बूस्टर के बाद लोगों की सेहत पर पड़ने वाले असर डेटा मिलेगा लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है.वैक्सीन गंभीर रूप से बीमार लोगों के एक हिस्से को तो बचा लेगी लेकिन अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या या मरने वालों की तादाद बीते कुछ महीनों की तुलना में अधिक होगी.
इसके दो कारण होंगे. जब बहुत सारे लोग बीमार होते हैं तो उनमें हेल्थकेयर वर्कर भी शामिल होते हैं. स्टाफ़ की कमी से जूझते अस्पतालों में मरीज़ों की भीड़ लग जाती है. लेकिन उन्हें अच्छी सेवाएं नहीं मिल पाती हैं. साथ ही सर्दियों में कोविड के अलावा दूसरे वायरस भी सक्रिय होते हैं, जिनकी वजह से अस्पताल में भर्तियां अधिक रहती हैं.चीन में वैक्सीनेशन में तेज़ी और पैक्सलोविड को भी इसमें शामिल किया जाना तो ठीक है पर ये इस तरह वक्त के साथ दौड़ है. क्योंकि उस देश आने वाले दिनों में लोगों की यात्राएं बढ़ने वाली हैं.तो जो कुछ दुनिया ने पीछे कुछ सालों में सहा है वो चीन को आने वाले कुछ हफ़्तों के भीतर सहना है.
साभार बीबीसी हिंदी

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